मसूरी, मसूरी आज तक ब्यूरो। बेटी बचाओ, बेटी पढाओ वाली सरकार मातृशक्ति के प्रति कितनी संवेदनशील है, यह अपनी मांगों को लेकर एक माह से भी अधिक समय से सड़कों पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर आशा कार्यकत्रियों के स्थिति को देखकर सहज ही समझ में आता है। सरकार ने अभी तक आशा कार्यकत्रियों से बात करना मुनासिब नही समझा। जिसे लेकर मसूरी के विभिन्न सामाजिक व राजनैतिक संगठनों ने आशा कार्यकत्रियों के धरना-प्रदर्शन को अपना समर्थन देते हुए एक दिवसीय क्रमिक अनशन किया व सरकार से शीघ्र आशाओं की मांगों पर अमल करने की मांग की।
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| आशाओं के धरना-प्रदर्शन के समर्थन में क्रमिक अनशन पर बैठे विभिन्न राजनैतिक सामाजिक व मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि |
बुधवार को आशा कार्यकत्रियों के धरना- प्रदर्शन को नगर के राजनैतिक व सामाजिक संगठनो ने अपना समर्थन दिया व सरकार से आशाओं की मांगों पर शीघ्र अमल करने की मांग की। आशा कार्यकत्रियों के समर्थन में कांग्रेस शहर अध्यक्ष सतीश ढौंडियाल, महिला कांग्रेस अध्यक्ष जसबीर कौर, मंदी समिति के पूर्व अध्यक्ष उपेन्द्र थापली, सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप भंडारी, होटल रेस्टोरेंट कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सोवन सिंह पंवार, दून स्कूल यूनियन के अध्यक्ष बैशाख सिंह मिश्रवाण, भाजपा के वरिष्ठ नेता रूपचंद शर्मा ने एक दिवसीय क्रमिक अनशन किया। वहीँ सरकार को चेतावनी दी कि शीघ्र ही आशाओं की मांगों कर अमल नही हुआ तो आन्दोलन को तेज किया जाएगा।
महिला कांग्रेस शहर अध्यक्षा जसवीर कौर व नगर कांग्रेस अध्यक्ष सतीश ढौंडियाल ने कहा कि सरकार आशाओं का उत्पीड़न करना बंद करे व मातृशक्ति का सम्मान करते हुए उनकी समस्याओं का समाधान निकाले। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से सरकार आशाओं की मांगों को लेकर संवेदनहीन बनी हुयी है वह निंदनीय है। उन्होंने कहा कि आज मातृशक्ति विगत एक माह से भी अधिक समय से सड़को पर आन्दोलन करने को बाध्य है तो ये सरकार की नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों का पुरजोर विरोध किया जायेगा।
सामाजिक कार्यकर्ता व कीर्तिनगर नागरिक विकास समिति के संयोजक प्रदीप भंडारी ने भी आशाओं की मांगों को लेकर सरकार से विचार करने की मांग की है, उन्होंने कहा कि आशा कार्यकत्रियां कठिन परिस्थितियों में भी लोगों के घरों से लेकर अस्पतालों तक अपनी सेवाए देती आ रही है, सरकार को आशाओं से बातचीत करके उनकी समस्याओं का शीघ्र हल निकलना चाहिए।
आशाओं की मांग है कि उन्हें अन्य स्कीम वर्करों की भांति न्यूनतम वेतन व मानदेय दिया जाना चाहिए, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है। सन 2012-13, 2013-14, 2015-16, 2016-17 चारों की पांच हजार रूपये प्रति वर्ष प्रोत्साहन राशि को एक मुश्त भुगतान अविलंब किया जाये, लेकिन सरकार इस ओर किसी भी प्रकार की कोई कार्ययोजना तैयार नहीं कर पा रही है, बल्कि आंदोलन को तोड़ने की रणनीति अपना रही है। सरकार अभी तक इस दिशा में गंभीर नहीं दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि आशा कार्यकत्र्रियों को बोनस का भुगतान तत्काल प्रभाव से किया जाये और 45वें श्रम सम्मेलन के फैसले के अनुसा आशा कार्यकत्र्रियों को कर्मकार घोषित किया और वर्तमान समय में बढ़ती हुई महंगाई को देखते उनके भत्तों में महंगाई के अनुरूप बढोत्तरी की जाये। पूर्व में मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री एवं स्वास्थ्य महानिदेशक को अवगत कराये जाने के बाद भी आज तक समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है जिससे उनमें रोष बना हुआ है। उनके हितों के लिए किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। लगातार उनके हितों की अनदेखी की जा रही है। जिसे किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा
क्रमिक अनशन में विक्रम बलुड़ी, रमेश महर, राजेश रावत, सुनीता सेमवाल, उषा भट्ट, विनीता नेगी, शिवदेई, सीमा देवी, कुसुम तोमर, विजेता रमोला, संगीता भंडारी, रेनू आदि शामिल रहे।



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