नैनीतालर। सरकारी तंत्र की सुस्ती का फायदा उठाते हुए खनन माफिया जिले में लगातार पैर पसारते जा रहे हैं। बेखौफ इतने कि दिन के उजाले में भी जेसीबी और अन्य मशीनों से अवैध खनन कर रहे हैं। मुवानी क्षेत्र के केदारेश्वर में लंबे समय से अवैध खनन चल रहा है और सरकारी तंत्र सब कुछ जानते हुए भी आंखे मूंदे तमाशा देख रहा है। 


नदियों का सीना छलनी कर खनन माफिया लगातार मजबूत हो रहा है, वहीं सरकारी तंत्र के जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी अंदरूनी तालमेल की तरफ इशारा कर रही है। तहसील मुख्यालय से 15 किमी दूर कमतोली का केदारेश्वर क्षेत्र खनन माफिया का अड्डा बन गया है। यहां खनन माफिया का कहर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। थल की जीवनधारा कही जाने वाली रामगंगा नदी तट पर खनन माफिया सरेआम लगातार अवैध खनन कर रहे हैं। इन्हें न न्यायालय के आदेश की परवाह, न पर्यावरण से सरोकार और न ही प्रशासनिक कार्रवाई का डर है। उनके हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने नदी तक जाने के लिए एक किमी सड़क और नदी किनारे दीवारों का निर्माण तक कर डाला है। खनन माफिया द्वारा रामगंगा नदी में अंधाधुंध रेत और बजरी का दोहन किया जा रहा है। नियमों को दरकिनार कर मशीनरी का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसा नहीं कि अवैध खनन की जानकारी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को न हो, लेकिन वे कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इसे देखकर यही कहा जा सकता है कि खनन में कहीं न कहीं प्रशासनिक मिलीभगत की बू साफ नजर आ रही है। एनजीटी के आदेशों की उड़ाई जा रही धज्जियांरेत के अवैध खनन से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। नदी किनारे से रेत का खनन करने से जहां बाढ़ की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, वहीं भारी कटान का भी खतरा बढ़ जाता है। इससे जैव विविधता नष्ट होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने वर्ष 2012 में नदियों से बालू के खनन पर रोक लगा रखी है, बावजूद इसके केदारेश्वर क्षेत्र से बेखौफ अवैध खनन कर एनजीटी के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
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