देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी ने अपना 85वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर आइएमए कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसके झा ने कहा कि आइएमए में कार्यरत सैन्य व सिविल स्टाफ की कर्तव्य निष्ठा व समर्पण भाव की प्रशंसा की। उन्होंने याद दिलाया कि आइएमए ने कई हजार सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर राष्ट्र को उत्कृष्ट सेवा प्रदान की।
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| भारतीय सैन्य अकादमी के स्थापना दिवस पर स्टाॅफ को सम्मानित करते आइएमए कमांडेंट। |
उन्होंने अकादमी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सैन्य व सिविल कर्मियों से और अधिक उत्साह के साथ काम करने का आग्रह किया। स्थापना दिवस समारोह के तहत विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। इसमें सिविल स्टाफ का सम्मान भी शामिल रहा। आइएमए एक अक्टूबर 1932 को अस्तित्व में आया। पिछले 85 वर्षों में अकादमी ने अपनी प्रशिक्षण क्षमता 40 से 1800 जैंटलमैन कैडेट तक बढ़ा दी है। अभी तक 59,932 जैंटलमैन कैडेट अकादमी से पास आउट हुए हैं। इसमें 30 मित्र देशों के विदेशी कैडेट भी शामिल हैं। अकादमी का समृद्ध इतिहास है और यहां से पास आउट कैडेटों ने सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल की है। उन्होंने न सिर्फ रण में, बल्कि सामरिक रणनीति में भी अहम योगदान दिया है। वहीं खेल व अन्य गतिविधियों में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। युद्ध में साहस और शौर्य प्रदर्शित करने पर मिलने वाले वीरता पदक खुद उनके पराक्रम व नेतृत्व कौशल की कहानियां कहते हैं। इस विशेष दिन पर स्टाफ के सभी सदस्यों, जैनटलमैन कैडेट्स, सैन्य और सिविल कर्मचारियों ने आइएमए की गौरवशाली विरासत को बनाए रखने के लिए समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ काम करने का संकल्प लिया।



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